Saturday, June 20, 2026

वह है जान मेरी शायरी | woh hai jaan meri (full shayari) by Poet Prasad OP

वह है चाँद मेरी, पर मैं उसे चाँद नहीं कह सकता, 

क्यूँकि चाँद भी अमावस में खो जाता है!

वह है सुकून मेरा, पर मैं उसे सुकून नहीं कह सकता, 

क्यूँकि सुकून भी किसी शोर में खो जाता है!

वह है हस्ती मेरी, पर मैं उसे हस्ती नहीं कह सकता, 

क्यूँकि हस्ती भी एक दिन फ़ना हो जाती है!

वह है जान मेरी, पर मैं उसे जान नहीं कह सकता, 

क्यूँकि जान भी एक दिन निकल जाती है! 


वह है जान मेरी शायरी | woh hai jaan meri (full shayari) by Poet Prasad OP 

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