आईने में जो खड़ा है, वो आज थोड़ा बदला है,
खुद से ही अब प्यार का, एक रास्ता निकला है।
जो बीत गई वो बातें, सब राख में दफ़न की हैं,
आज मैंने खुद से ही, करने की जतन की है।
मेरी खुशी की चाबी, अब किसी और के हाथ नहीं,
मैं खुद ही अपनी मंज़िल, खुद ही अपनी राह सही।
दुनिया की भीड़ में, खुद को खोया था मैंने,
दूसरों की तालियों में, अपना सुर बोया था मैंने।
अब शांत है शोर ये सारा, मैं खुद से ही मिलता हूँ,
मैं कांटों के बीच रहकर भी, अपने आप में खिलता हूँ।
गलतियाँ मेरी भी थीं, पर मैंने माफ़ किया है खुद को,
मैंने आज फिर से जिया है, जो खोया था वो वजूद को।
कोई आए न आए, मैं अपना साथ निभाऊंगा,
अपने ज़ख्मों पर खुद ही, उम्मीद का मरहम लगाऊंगा।
मेरी अपनी पहचान है, अपना एक अंदाज़ है,
मेरे इस अकेलेपन में भी, एक गूँजती आवाज़ है।
ठोकरों से संभलना, मैंने अब सीख लिया है,
खुद को हारकर भी, मैंने जीतना सीख लिया है।
मैं हूँ, और बस मैं हूँ,
अपनी दुनिया का, अब मैं ही तो शहंशाह हूँ।
हाँ, मैं खुद से प्यार करता हूँ,
मैं खुद से प्यार करता हूँ।
मैं खुद से प्यार करता हूँ | Mein Khud Se Pyaar Karta Hun Full Lyrics By Poet Prasad OP
0 comments:
Post a Comment